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Thursday, 2 July 2026

Shiv Tandav Strotam In Hindi



श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम्

श्री शिव ताण्डव स्तोत्रम्

॥ स्तोत्रम् ॥

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्‌॥

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-
विलोलोचीतरङ्गवल्लरीविराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम॥

धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धुबन्धुर-
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिममोदमानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
कचिद्दिगम्बरे (कचिच्चिदम्बरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि॥

जटामुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा-
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर-
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटकः
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा-
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदे शिरोजटालमस्तु नः॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम॥

नवीनमेघमण्डलीनिरुद्धदुर्धरस्फुरत्-
कुहूनिशीथिनीतमःप्रबन्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः॥

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा-
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे॥

अखर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्वमञ्जरी-
रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम्‌।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे॥ १०

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस-
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल-
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः॥ ११

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजो-
र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समप्रवृत्तिकः कदा सदाशिवं भजाम्यहम्‌॥ १२

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्‌
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मन्त्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌॥ १३

इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसन्ततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिन्तनम्‌॥ १४

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः
शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः॥ १५

॥ इति श्रीरावणकृतं शिवताण्डवस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
॥ हर हर महादेव ॥

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शिव तांडव स्तोत्र के लाभ | Shiv Tandav Stotram Benefits in Hindi

शिव तांडव स्तोत्र भगवान महादेव (भगवान शिव) की महिमा का अत्यंत प्रभावशाली और प्रसिद्ध स्तोत्र है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसकी रचना लंकेश्वर रावण ने भगवान शिव की आराधना करते समय की थी। यह स्तोत्र भगवान शिव के अद्भुत स्वरूप, तांडव नृत्य, अपार शक्ति और दिव्य तेज का सुंदर वर्णन करता है।

श्रद्धालु मानते हैं कि नियमित रूप से शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से मन में भक्ति, साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से सोमवार, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में इसका पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।


शिव तांडव स्तोत्र क्या है?

शिव तांडव स्तोत्र संस्कृत भाषा में रचित भगवान शिव की स्तुति है। इसमें भगवान शिव के रौद्र और कल्याणकारी दोनों स्वरूपों का अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है। इस स्तोत्र की प्रत्येक पंक्ति भगवान शिव की दिव्यता, ब्रह्मांडीय शक्ति और तांडव नृत्य की महिमा का वर्णन करती है।

आज भी लाखों शिवभक्त प्रतिदिन या विशेष अवसरों पर इस स्तोत्र का पाठ करते हैं और भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।


शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने के प्रमुख लाभ

1. भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का माध्यम

श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भगवान शिव के प्रति समर्पण व्यक्त करने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है।

2. मानसिक शांति प्राप्त होती है

नियमित रूप से स्तोत्र का पाठ मन को एकाग्र करने में सहायता करता है। इससे तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

3. आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि

भगवान शिव को संहार और सृजन दोनों का देव माना जाता है। उनका स्मरण व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

4. सकारात्मक ऊर्जा का संचार

भक्ति और ध्यान के साथ शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया जा सकता है।

5. आध्यात्मिक उन्नति

शिव तांडव स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं बल्कि आत्मिक विकास और भगवान शिव के प्रति गहन भक्ति का मार्ग भी माना जाता है।

6. एकाग्रता बढ़ाने में सहायक

संस्कृत श्लोकों का नियमित उच्चारण स्मरण शक्ति, ध्यान और एकाग्रता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

7. भय और चिंता कम करने की प्रेरणा

भगवान शिव का स्मरण व्यक्ति को निडर बनने और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की मानसिक शक्ति प्रदान करता है।

8. परिवार में सकारात्मक वातावरण

घर में भगवान शिव की आराधना और शिव तांडव स्तोत्र का सामूहिक पाठ श्रद्धा, शांति और सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माना जाता है।


शिव तांडव स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

  • प्रतिदिन प्रातःकाल या संध्या समय।
  • प्रत्येक सोमवार।
  • महाशिवरात्रि के दिन।
  • श्रावण (सावन) मास में।
  • प्रदोष व्रत के अवसर पर।
  • भगवान शिव की विशेष पूजा के समय।

शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने की विधि

  • प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • भगवान शिव के मंदिर या घर के पूजा स्थान में दीपक जलाएँ।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा श्रद्धानुसार अर्पित करें।
  • ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें।
  • शिव तांडव स्तोत्र का स्पष्ट उच्चारण और एकाग्र मन से पाठ करें।
  • अंत में भगवान शिव की आरती और प्रार्थना करें।

शिव तांडव स्तोत्र का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यता के अनुसार जब रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की, तब उसने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की। भगवान शिव उसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उसे अनेक दिव्य वरदान प्रदान किए। यही कारण है कि यह स्तोत्र शिवभक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।


शिव तांडव स्तोत्र और शिव चालीसा में अंतर

शिव तांडव स्तोत्र शिव चालीसा
संस्कृत भाषा में रचित मुख्यतः अवधी/हिंदी शैली में
भगवान शिव के तांडव और दिव्य स्वरूप का वर्णन भगवान शिव के जीवन और महिमा का सरल वर्णन
संस्कृत उच्चारण के कारण अपेक्षाकृत कठिन पढ़ने और याद करने में सरल
विशेष साधना एवं शिव आराधना में लोकप्रिय दैनिक पूजा-पाठ में व्यापक रूप से पढ़ी जाती है

शिव तांडव स्तोत्र से जुड़ी रोचक बातें

  • इसकी रचना लंकेश्वर रावण द्वारा की गई मानी जाती है।
  • यह भगवान शिव के तांडव नृत्य का अद्भुत वर्णन करता है।
  • यह संस्कृत साहित्य की उत्कृष्ट रचनाओं में से एक माना जाता है।
  • महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु इसका पाठ करते हैं।
  • श्रावण मास में इसका विशेष महत्व माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या शिव तांडव स्तोत्र रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, श्रद्धा और भक्ति के साथ प्रतिदिन इसका पाठ किया जा सकता है।

शिव तांडव स्तोत्र पढ़ने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?

प्रातःकाल, संध्या या सोमवार के दिन इसका पाठ शुभ माना जाता है।

क्या महिलाएँ शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कर सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ भी श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ कर सकती हैं।

क्या शिव तांडव स्तोत्र संस्कृत में ही पढ़ना चाहिए?

यदि संभव हो तो मूल संस्कृत पाठ का उच्चारण करें। यदि उच्चारण कठिन लगे तो अर्थ समझकर श्रद्धा के साथ पढ़ना भी लाभदायक माना जाता है।

क्या शिव तांडव स्तोत्र और महामृत्युंजय मंत्र साथ में पढ़ सकते हैं?

हाँ, अनेक शिवभक्त अपनी पूजा में शिव तांडव स्तोत्र, महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप एक साथ करते हैं।


निष्कर्ष

शिव तांडव स्तोत्र भगवान महादेव की महिमा का अद्भुत स्तोत्र है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मविश्वास, आध्यात्मिक प्रेरणा और सकारात्मक सोच प्रदान करने में सहायक हो सकता है। भगवान शिव की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची भक्ति, विनम्रता और सदाचार है।


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